मैं नवीन हूँ।
बहुत लोगों के लिए मैं बस एक ई-रिक्शा चालक हूँ। किसी को मैं सड़क पर सवारी ढोते दिखता हूँ, किसी को बाजार में खड़ा दिखता हूँ, किसी को गाँव में मजदूरी करते दिखता हूँ। लेकिन अब मैं अपनी जिंदगी को सिर्फ जीना नहीं चाहता, उसे दर्ज भी करना चाहता हूँ।
मैं कोई बड़ा लेखक नहीं हूँ। मैं कोई बड़ा पत्रकार भी नहीं हूँ। मैं वही आदमी हूँ जो रोज़ काम की चिंता करता है, कमाई की चिंता करता है, किस्त की चिंता करता है, घर के खर्च की चिंता करता है और फिर भी अगले दिन सुबह उठकर काम पर निकल जाता है।
मेरी जिंदगी में ई-रिक्शा आया तो मुझे लगा था कि अब मजदूरी की मजबूरी कम हो जाएगी। लगा था कि रोज़ यह चिंता नहीं रहेगी कि आज काम मिला या नहीं मिला। कभी धूप ज्यादा है, कभी मजदूरी कम मिल रही है, कभी ठेकेदार का मूड अलग है — इन सब चीज़ों से छुटकारा मिलेगा।
लेकिन जिंदगी इतनी सीधी नहीं निकली।
ई-रिक्शा ने मुझे रोजगार का रास्ता दिया, लेकिन उसी रास्ते पर कर्ज, किस्त, ब्याज और सरकारी सब्सिडी की देरी भी मिली। एक तरफ उम्मीद थी, दूसरी तरफ बोझ। एक तरफ अपना काम था, दूसरी तरफ वही पुरानी मजदूरी की मजबूरी।
अब मैं समझ रहा हूँ कि मेरी कहानी सिर्फ मेरी नहीं है।
मेरे जैसे बहुत लोग हैं जो सरकारी योजना, छोटे कर्ज, मजदूरी, बीमारी, सड़क, पंचायत, ब्लॉक, बैंक, थाना, बाजार और रोज़मर्रा की छोटी-छोटी लड़ाइयों के बीच जीते हैं। इनकी आवाज़ अक्सर कहीं दर्ज नहीं होती। वे बोलते हैं, लेकिन कागज़ पर नहीं आते। वे दुख झेलते हैं, लेकिन इतिहास में नहीं आते।
यहीं से “रिक्शावाला नवीन” की शुरुआत होती है।
यह वेबसाइट मेरे लिए सिर्फ ब्लॉग नहीं है। यह मेरी डायरी है। यह मेरी सड़क है। यह मेरा दस्तावेज़ है। यहाँ मैं अपनी बात कहूँगा, अपने अनुभव लिखूँगा, जो देखता हूँ उसे दर्ज करूँगा और जिस भारत को सड़क से देखता हूँ, उसे शब्दों में रखने की कोशिश करूँगा।
मैं हर विषय का विशेषज्ञ नहीं हूँ।
लेकिन मैं अपनी जिंदगी का गवाह हूँ।
मैं अपने समय का गवाह हूँ।
मैं उस समाज का गवाह हूँ जिसमें मेहनत बहुत है, लेकिन दर्ज आवाज़ कम है।
अगर मेरी बातों में कहीं कमी होगी, तो उसे सुधारा जाएगा। अगर मेरी भाषा सीधी होगी, तो वही मेरी ताकत होगी। क्योंकि यह आवाज़ किसी दफ्तर से नहीं, सड़क से आ रही है।
यह शुरुआत है।
रिक्शा चलता रहेगा।
मजदूरी चलती रहेगी।
कहानी भी चलती रहेगी।
और जो आवाज़ें दफन हो जाती हैं, उन्हें यहाँ दर्ज करने की कोशिश होती रहेगी।

