आज से मैं फोटो को सिर्फ फोटो की तरह नहीं देखना चाहता।

कई बार हम सड़क पर चलते हुए कुछ देखते हैं, फोटो खींचते हैं और फिर भूल जाते हैं। लेकिन अगर उसी फोटो के साथ तारीख, जगह, समस्या और असर लिख दिया जाए, तो वही फोटो दस्तावेज़ बन जाती है।



एक टूटी सड़क की फोटो सिर्फ टूटी सड़क नहीं है।
वह बताती है कि उस रास्ते से लोग गुजरते हैं।
वह बताती है कि वाहन टूटते हैं।
वह बताती है कि बच्चों, बुजुर्गों, मरीजों और मजदूरों को परेशानी होती है।
वह बताती है कि किसी स्तर पर व्यवस्था ने उस जगह को ठीक से नहीं देखा।

इसी तरह ई-रिक्शा स्टैंड की फोटो सिर्फ गाड़ियों की लाइन नहीं है।
वह बेरोजगारी, इंतजार, कमाई, प्रतिस्पर्धा और रोज़गार की कहानी है।

मजदूरी करते हाथ की फोटो सिर्फ हाथ नहीं है।
वह श्रम का प्रमाण है।
वह बताती है कि फल, घर, सड़क, भवन, खेत, दुकान — सबके पीछे किसी न किसी मजदूर का शरीर लगा है।



इसलिए अब मेरी कोशिश होगी कि हर महत्वपूर्ण फोटो के साथ पाँच बातें लिखी जाएँ:

  1. यह फोटो कहाँ की है?
  2. यह फोटो कब ली गई?
  3. इसमें क्या दिख रहा है?
  4. इससे किसे परेशानी या असर है?
  5. यह फोटो किस बड़ी कहानी की तरफ इशारा करती है?

अगर फोटो के साथ ये बातें नहीं होंगी, तो फोटो सिर्फ दृश्य बनकर रह जाएगी। लेकिन अगर फोटो के साथ संदर्भ होगा, तो वह रिकॉर्ड बनेगी।

फोटो दस्तावेज़ फॉर्मेट

सवालजवाब
फोटो की तारीखलिखना बाकी
स्थानलिखना बाकी
विषयसड़क / मजदूरी / ई-रिक्शा / पंचायत / बाजार
दिखाई देने वाली समस्यालिखना बाकी
असरकिस पर असर पड़ रहा है
अगला कदमरिपोर्ट / लेख / शिकायत / follow-up

यह वेबसाइट इसी तरह धीरे-धीरे तस्वीरों को रिकॉर्ड में बदलेगी।

तस्वीर आँख को दिखाती है।
लेकिन दस्तावेज़ याद रखता है।