सड़क पर चलने वाले आदमी को सड़क सिर्फ रास्ता नहीं लगती।

मेरे लिए सड़क रोज़गार भी है, जोखिम भी है और समाज को पढ़ने की जगह भी है।

जब मैं ई-रिक्शा चलाता हूँ, तो सड़क का हर गड्ढा मेरे लिए सिर्फ गड्ढा नहीं होता। वह मेरे वाहन की बैटरी पर असर डालता है, टायर पर असर डालता है, सवारी की सुरक्षा पर असर डालता है, मेरी कमाई पर असर डालता है। खराब सड़क से सिर्फ गाड़ी नहीं हिलती, गरीब आदमी की रोज़ी भी हिलती है।

जो आदमी कार में बैठकर सड़क पार करता है, उसे गड्ढा झटका लगता है।
जो आदमी ई-रिक्शा चलाकर रोज़ उसी रास्ते से गुजरता है, उसके लिए वह गड्ढा खर्च बन जाता है।

कभी-कभी लोग मजाक में कहते हैं — सड़क में गड्ढा है या गड्ढे में सड़क? लेकिन यह मजाक नहीं है। यह सवाल है कि सड़क बनी किसके लिए? जनता के पैसे से बनी सड़क अगर जनता को ही सुरक्षित रास्ता नहीं दे पा रही, तो फिर उसका जवाब कौन देगा?

मैंने देखा है कि सड़क की खराब हालत सबसे ज्यादा गरीब आदमी को मारती है।

मजदूर पैदल जाता है, रिक्शावाला उसी सड़क पर चलता है, बच्चा स्कूल जाता है, मरीज अस्पताल जाता है, बुजुर्ग आदमी गिरने से डरता है। एक गड्ढा सिर्फ मिट्टी और टूटे पत्थर का मामला नहीं है। वह व्यवस्था की प्राथमिकता दिखाता है।

सड़क से समाज पढ़ा जा सकता है।

जहाँ सड़क टूटी है, वहाँ सिर्फ रास्ता नहीं टूटा। वहाँ नागरिक सम्मान भी टूटा है। वहाँ यह भी दिखता है कि किस जगह को कितना महत्व दिया गया और किस जगह को नजरअंदाज कर दिया गया।

अब मैं कोशिश करूँगा कि सड़क पर जो भी देखूँ, उसे सिर्फ देख कर आगे न बढ़ूँ। अगर कोई गड्ढा है, तो उसकी फोटो हो। तारीख हो। जगह हो। किसे परेशानी हो रही है, वह लिखा जाए। अगर किसी ने शिकायत की है, तो वह भी दर्ज हो। अगर मरम्मत हुई, तो वह भी दर्ज हो।

यह काम छोटा लग सकता है। लेकिन जो दर्ज नहीं होता, वह गायब हो जाता है।

मेरे लिए सड़क अब सिर्फ रास्ता नहीं है।
सड़क मेरी किताब है।
रिक्शा मेरा चलने वाला डेस्क है।
और गड्ढे इस व्यवस्था के फुटनोट हैं।

फोटो दस्तावेज़ के लिए नोट

जब इस तरह की रिपोर्ट बनेगी, तो हर फोटो के साथ यह जानकारी होगी:

बिंदुविवरण
स्थानगाँव / सड़क / चौक
तारीखजिस दिन फोटो ली गई
समस्यागड्ढा / जलजमाव / टूटा रास्ता
असरसवारी, मजदूर, बच्चे, बुजुर्ग, वाहन
स्थितिमरम्मत हुई या नहीं